Telefonu Nasil Tv Ye Yansıtma

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Posted by: BK Prerana

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    Telefonu Televizyona Yansıtma: Kapsamlı Bir Kılavuz

    Giriş

    Telefonlarımız günlük hayatımızda önemli bir rol oynar. Fotoğraf ve video çekmek, oyun oynamak, internette gezinmek ve daha fazlası için kullanırız. Telefon ekranı bazen küçük kalabilir ve daha büyük bir ekranda içeriklerimizi izlemek isteyebiliriz. Bu durumda, telefonumuzu televizyona yansıtma özelliğinden faydalanabiliriz.

    Yöntemler

    Telefonunuzu televizyona yansıtmanın birkaç farklı yöntemi vardır:

    Kablolu Bağlantı:

    • HDMI Kablosu: Bu en yaygın ve güvenilir yöntemdir. Telefonunuzda ve TV'nizde HDMI girişi varsa, bir HDMI kablosu kullanarak onları birbirine bağlayabilirsiniz.
    • MHL Adaptörü: Telefonunuzda MHL desteği varsa, bir MHL adaptörü ve HDMI kablosu kullanarak TV'nize bağlayabilirsiniz.

    Kablosuz Bağlantı:

    • Miracast: Bu, birçok modern akıllı telefon ve TV'de bulunan bir kablosuz teknolojidir. Telefonunuz ve TV'niz Miracast'ı destekliyorsa, herhangi bir ek cihaza ihtiyaç duymadan onları birbirine bağlayabilirsiniz.
    • Google Chromecast: Chromecast, telefonunuzdan TV'nize video, müzik ve fotoğraf aktarmak için kullanabileceğiniz bir cihazdır. Chromecast'i TV'nizin HDMI girişine takın ve telefonunuzda Google Home uygulamasını kullanarak bağlantıyı kurun.
    • Apple AirPlay: Apple AirPlay, iPhone ve iPad'inizi Apple TV'ye veya AirPlay 2 uyumlu bir TV'ye yansıtmak için kullanabileceğiniz bir teknolojidir.

    Uyumluluk

    Telefonunuzu TV'nize yansıtmadan önce, her iki cihazın da seçtiğiniz yöntemi desteklediğinden emin olun. Telefonunuzun ve TV'nizin modelini ve özelliklerini kontrol ederek bunu yapabilirsiniz.

    Sorun Giderme

    Bazen telefonunuzu TV'nize yansıtma işleminde sorunlar yaşayabilirsiniz. Bu durumda, aşağıdakileri deneyebilirsiniz:

    • Her iki cihazın da açık ve aynı Wi-Fi ağına bağlı olduğundan emin olun.
    • Telefonunuzda ve TV'nizde en son yazılım güncellemelerinin yüklü olduğundan emin olun.
    • Cihazlarınızı yeniden başlatmayı deneyin.
    • Farklı bir bağlantı yöntemi deneyin.

    Ek Özellikler

    Bazı telefonlar ve TV'ler, ekran yansıtma özelliğine ek olarak aşağıdaki gibi ek özellikler sunabilir:

    • Ses aktarma: Telefonunuzdan TV'nize ses de aktarabilirsiniz.
    • Ekran kontrolü: Telefonunuzu kullanarak TV'nizin ekranını kontrol edebilirsiniz.

    Sonuç

    Telefonunuzu TV'nize yansıtmak, daha büyük bir ekranda içeriklerinizi izlemenin ve keyfini çıkarmanın harika bir yoludur. Yukarıdaki bilgiler, telefonunuzu TV'nize yansıtmak için en uygun yöntemi seçmenize ve bağlantıyı kurmanıza yardımcı olacaktır.

    Not: Bu kılavuz genel bilgiler içermektedir. Daha fazla bilgi için telefonunuzun ve TV'nizin kullanım kılavuzuna bakabilirsiniz.


    12-08-2020
    प्रात:मुरली
    ओम् शान्ति
    "बापदादा"' मधुबन

    “मीठे बच्चे - तुम आसुरी मत पर चलने से दरबदर हो गये, अब ईश्वरीय मत पर चलो तो सुखधाम चले जायेंगे''
    प्रश्नः- बच्चों को बाप से कौन सी उम्मीद रखनी है, कौन सी नहीं?
    उत्तर:- बाप से यही उम्मीद रखनी है कि हम बाप द्वारा पवित्र बन अपने घर और घाट (राजधानी) में जायें। बाबा कहते हैं - बच्चे, मेरे में यह उम्मीद नहीं रखो कि फलाना बीमार है, आशीर्वाद मिले। यहाँ कृपा या आशीर्वाद की बात ही नहीं है। मैं तो आया हूँ तुम बच्चों को पतित से पावन बनाने। अब मैं तुमको ऐसे कर्म सिखलाता हूँ जो विकर्म न बनें।
    गीत:- आज नहीं तो कल बिखरेंगे यह बादल........



    ओम् शान्ति। रूहानी बच्चों ने गीत सुना। बच्चे जानते हैं अब घर चलना है। बाप आये हैं लेने के लिए। यह याद भी तब रहेगी जब आत्म-अभिमानी होंगे। देह-अभिमान में होंगे तो याद भी नहीं रहेगी। बच्चे जानते हैं बाबा मुसाफिर होकर आया है। तुम भी मुसाफिर होकर आये थे। अब अपने घर को भूल गये हो। फिर बाप ने घर याद दिलाया है और रोज़-रोज़ समझाते हैं। जब तक सतोप्रधान नहीं बने हो तो चल नहीं सकेंगे। बच्चे समझते हैं बाबा तो ठीक कहते हैं। बाप भी बच्चों को जो श्रीमत देते हैं तो सपूत बच्चे उस पर चल पड़ते हैं। इस समय और तो कोई ऐसा बाप नहीं जो अच्छी मत देवे इसलिए दरबदर हो पड़े हैं। श्रीमत देने वाला एक ही बाप है। उस मत पर भी कोई बच्चे नहीं चलते। वण्डर है। लौकिक बाप की मत पर चल पड़ते हैं। वह है आसुरी मत। यह भी है तो ड्रामा। परन्तु बच्चों को समझाते हैं तुमने आसुरी मत पर चल इस गति को पा लिया है। अब ईश्वरीय मत पर चलने से तुम सुखधाम में चले जायेंगे। वह है बेहद का वर्सा। रोज़ समझाते हैं। तो बच्चों को कितना हर्षित रहना चाहिए। सबको यहाँ तो नहीं बिठा सकते। घर में रहकर भी याद करना है। अभी पार्ट पूरा होने का है, अब वापिस घर चलना है। मनुष्य कितना भूले हुए हैं। कहा जाता है ना - यह तो अपना घर घाट ही भूल गये हैं। अब बाप कहते हैं घर को भी याद करो। अपनी राजधानी भी याद करो। अभी पार्ट पूरा होने का है, अब वापिस घर चलना है। क्या तुम भूल गये हो?

    तुम बच्चे कह सकते हो - बाबा ड्रामा अनुसार हमारा पार्ट ही ऐसा है, जो हम घरबार को भूल एकदम भटक रहे हैं। भारतवासी ही अपने श्रेष्ठ धर्म, कर्म को भूल कर दैवी धर्म भ्रष्ट, दैवी कर्म भ्रष्ट हो पड़े हैं। अभी बाप ने सावधानी दी है, तुम्हारा धर्म कर्म तो यह था। वहाँ तुम जो कर्म करते थे वह अकर्म होता था। कर्म, अकर्म, विकर्म की गति बाप ने ही तुम्हें समझाई है। सतयुग में कर्म, अकर्म हो जाते हैं। रावण राज्य में कर्म विकर्म होते हैं। अभी बाप आया हुआ है, धर्म श्रेष्ठ कर्म श्रेष्ठ बनाने। तो अब श्रीमत पर कर्म श्रेष्ठ करना चाहिए। कोई भ्रष्ट कर्म करके किसको दु:ख नहीं देना चाहिए। ईश्वरीय बच्चों का यह काम नहीं है। जो डायरेक्शन मिलते हैं उस पर चलना है, दैवीगुण धारण करने हैं। भोजन भी शुद्ध लेना है, अगर लाचारी नहीं मिलता तो राय पूछो। बाबा समझते हैं नौकरी आदि में कहाँ थोड़ा खाना भी पड़ता है। जबकि योगबल से तुम राजाई स्थापन करते हो, पतित दुनिया को पावन बनाते हो तो भोजन को शुद्ध बनाना क्या बड़ी बात है। नौकरी तो करनी ही है। ऐसे तो नहीं बाप का बनें तो सब कुछ छोड़ यहाँ आकर बैठ जाना है। कितने ढेर बच्चे हैं, इतने सब तो रह नहीं सकते। रहना सबको गृहस्थ व्यवहार में है। यह समझना है - मैं आत्मा हूँ, बाबा आया हुआ है, हमको पवित्र बनाकर अपने घर ले जाते हैं फिर राजधानी में आ जायेंगे। यह तो पराया रावण का छी-छी घाट है। तुम बिल्कुल ही पतित बन गये हो, ड्रामा प्लैन अनुसार। बाप कहते हैं अभी मैं तुमको सुजाग करने आया हूँ तो श्रीमत पर चलो। जितना चलेंगे उतना श्रेष्ठ बनेंगे।

    अभी तुम समझते हो हम बाप को जो बाप स्वर्ग का मालिक बनाते हैं, उनको भूल गये। अब बाबा सुधारने आये हैं तो अच्छी रीति सुधरना चाहिए ना। खुशी में आना चाहिए। बेहद का बाप मिला है, बच्चों से बात ऐसे करते हैं जैसे तुम आत्मायें आपस में करती हो। है तो वह भी आत्मा। परम आत्मा है, उनका भी पार्ट है। तुम आत्मायें पार्टधारी हो। ऊंच ते ऊंच से लेकर नीच ते नीच का पार्ट है। भक्ति मार्ग में मनुष्य गाते हैं ईश्वर ही सब कुछ करते हैं। बाप कहते हैं मेरा ऐसा पार्ट थोड़ेही है जो बीमार को अच्छा कर दूँ। हमारा पार्ट है रास्ता बताना कि तुम पवित्र कैसे बनो? पवित्र बनने से ही तुम घर में भी जा सकेंगे। राजधानी में भी जा सकेंगे। और कोई उम्मीद मत रखो। फलाना बीमार है, आशीर्वाद मिले। नहीं, आशीर्वाद, कृपा आदि की बात मेरे पास कुछ भी नहीं। उसके लिए साधू-सन्तों आदि के पास जाओ। तुम हमको बुलाते ही हो कि हे पतित-पावन आओ, आकर हमको पावन बनाओ। पावन दुनिया में ले चलो। तो बाप पूछते हैं मैं तुमको विषय सागर से निकाल पार ले जाता हूँ, फिर तुम विषय सागर में क्यों फँस जाते हो? भक्ति मार्ग में तुम्हारा यह हाल हुआ है। ज्ञान, भक्ति तुम्हारे लिए है। संन्यासी लोग भी कहते हैं ज्ञान, भक्ति और वैराग्य। परन्तु उनका अर्थ वह नहीं समझते। अब तुम्हारी बुद्धि में है ज्ञान, भक्ति बाद में वैराग्य। तो बेहद का वैराग्य सिखलाने वाला चाहिए। बाप ने समझाया था यह कब्रिस्तान है, इनके बाद परिस्तान बनना है। वहाँ हर कर्म, अकर्म होता है। अभी बाबा तुमको ऐसे कर्म सिखलाते हैं जो कोई भी विकर्म न बनें। किसी को भी दु:ख न दो। पतित का अन्न मत खाओ। विकार में मत जाओ। अबलाओं पर अत्याचार ही इस पर होते हैं। देखते रहते हो - माया के विघ्न कैसे पड़ते हैं। यह है सब गुप्त। कहते हैं देवताओं और असुरों की युद्ध लगी। फिर कहते हैं - पाण्डव और कौरवों की युद्ध लगी। अब लड़ाई तो एक ही है। बाप समझाते हैं मैं तुमको राजयोग सिखला रहा हूँ भविष्य 21 जन्मों के लिए। यह मृत्युलोक है। मनुष्य सत्य नारायण की कथा सुनते आये हैं, फायदा कुछ नहीं। अभी तुम सच्ची गीता सुनाते हो। रामायण भी तुम सच्ची सुनाते हो। एक राम-सीता की बात नहीं थी। इस समय तो सारी दुनिया लंका है। चारों ओर पानी है ना। यह है बेहद की लंका, जिसमें रावण का राज्य है। एक बाप है ब्राइडग्रूम। बाकी सब हैं ब्राइड्स। तुमको अब रावण राज्य से बाप छुड़ाते हैं। यह है शोक वाटिका। सतयुग को कहा जाता है अशोक वाटिका। वहाँ कोई शौक होता नहीं। इस समय तो शोक ही शोक है। अशोक एक भी नहीं रहता। नाम तो रख देते हैं अशोका होटल। बाप कहते हैं सारी दुनिया इस समय बेहद की होटल ही समझो। शोक की होटल है। खान-पान मनुष्यों का जानवरों मिसल है। तुमको देखो बाप कहाँ ले जाते हैं। सच्ची-सच्ची अशोक वाटिका है सतयुग में। हद और बेहद का कान्ट्रास्ट बाप ही बतलाते हैं। तुम बच्चों को बहुत खुशी रहनी चाहिए। जानते हो बाबा हमको पढ़ाते हैं। हमारा भी वही धन्धा है - सबको रास्ता बताना, अन्धों की लाठी बनना। चित्र भी तुम्हारे पास हैं। जैसे स्कूल में चित्रों पर समझाते हैं, यह फलाना देश है। तुम तो फिर समझाते हो तुम आत्मा हो, शरीर नहीं हो। आत्मायें भाई-भाई हैं। कितनी सहज बात सुनाते हो। कहते भी हैं हम सब भाई-भाई हैं। बाप कहते हैं तुम सभी आत्मायें भाई-भाई हो ना। गॉड फादर कहते हो ना। तो कभी भी आपस में लड़ना-झगड़ना नहीं चाहिए। शरीरधारी बनते हैं तो फिर भाई-बहन हो जाते। हम शिवबाबा के बच्चे सब भाई-भाई हैं। प्रजापिता ब्रह्मा के बच्चे भाई-बहिन हैं, हमको वर्सा दादे से लेना है इसलिए दादे को ही याद करते हैं। इस बच्चे (ब्रह्मा) को भी हमने अपना बनाया है अथवा इनमें प्रवेश किया है। इन सब बातों को तुम अभी समझते हो। बाप कहते हैं - बच्चे, अब नया दैवी प्रवृत्ति मार्ग स्थापन हो रहा है। तुम सभी बी.के. शिवबाबा की मत पर चलते हो। ब्रह्मा भी उनकी मत पर चलते हैं। बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो और सर्व संबंधों को हल्का करते जाओ। 8 घण्टा याद रखनी है बाकी 16 घण्टे में आराम वा धंधा आदि जो करना है सो करो। मैं बाप का बच्चा हूँ, यह नहीं भूलो। ऐसे भी नहीं यहाँ आकर हॉस्टल में रहना है। नहीं, गृहस्थ व्यवहार में बाल बच्चों के साथ रहना है। बाबा पास आते ही हैं रिफ्रेश होने। मथुरा, वृन्दावन में जाते हैं मधुबन का दीदार करने। छोटा मॉडल रूप में बना रखा है। अब तो यह बेहद की बात समझने की है। शिवबाबा ब्रह्मा द्वारा नई सृष्टि रच रहे हैं। हम प्रजापिता ब्रह्मा की सन्तान बी.के. हैं। विकार की बात हो न सके। संन्यासियों के शिष्य बनते हैं, अगर वह संन्यासी कपड़ा पहन लेवे तो नाम बदली हो जाता है। यहाँ भी तुम बाबा के बन गये तो नाम रखे ना बाबा ने। कितने भट्ठी में रहे थे। इस भट्ठी का किसको पता नहीं। शास्त्रों में तो क्या-क्या बातें लिखी हैं, फिर भी ऐसा ही होगा। अब तुम्हारी बुद्धि में सृष्टि का चक्र फिरता है। बाप भी स्वदर्शन चक्रधारी है ना। सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जानता है। बाबा को तो शरीर भी नहीं। तुमको तो स्थूल शरीर है। वह है ही परम आत्मा। आत्मा ही स्वदर्शन चक्रधारी है ना। अब आत्मा को अलंकार कैसे दिये जायें? समझ की बात है ना। यह कितनी महीन बातें हैं। बाप कहते हैं वास्तव में मैं हूँ स्वदर्शन चक्रधारी। तुम जानते हो - आत्मा में सारे सृष्टि चक्र का ज्ञान आ जाता। बाबा भी परमधाम में रहने वाला है, हम भी वहाँ के रहने वाले हैं। बाप आकर अपना परिचय देते हैं - बच्चे मैं भी स्वदर्शन चक्रधारी हूँ। मैं पतित-पावन आया हूँ तुम्हारे पास। मुझे बुलाया ही है कि आकर पतित से पावन बनाओ, लिबरेट करो। उनको शरीर तो है नहीं। वह अजन्मा है। भल जन्म लेते भी हैं परन्तु दिव्य। शिव जयन्ती अथवा शिवरात्रि मनाते हैं। बाप कहते हैं मैं आता ही हूँ तब जब रात पूरी होती है, तो दिन बनाने आता हूँ। दिन में 21 जन्म फिर रात में 63 जन्म, आत्मा ही भिन्न-भिन्न जन्म लेती है। अब दिन से रात में आई है फिर दिन में जाना है। स्वदर्शन चक्रधारी भी तुमको बनाया है। इस समय मेरा पार्ट है। तुमको भी स्वदर्शन चक्रधारी बनाता हूँ। तुम फिर औरों को बनाओ। 84 जन्म कैसे लिये हैं, वह 84 जन्मों का चक्र तो समझा लिया है। आगे तुमको यह ज्ञान था क्या? बिल्कुल नहीं। अज्ञानी थे। बाबा मूल बात समझाते हैं कि बाबा है स्वदर्शन चक्रधारी, उनको ज्ञान का सागर कहा जाता है। वह सत्य है, चैतन्य है। तुम बच्चों को वर्सा दे रहे हैं। बाबा बच्चों को समझाते हैं, आपस में लड़ो-झगड़ो मत। लूनपानी मत बनो। सदैव हर्षित रहना है और सबको बाप का परिचय देना है। बाप को ही सब भूले हुए हैं। अब बाप कहते हैं मामेकम् याद करो। निराकार भगवानुवाच - निराकारी आत्माओं प्रति। असुल तुम निराकार हो फिर साकारी बनते हो। साकार बिगर तो आत्मा कुछ कर ही नहीं सकती। आत्मा शरीर से निकल जाती तो चुरपुर कुछ भी हो नहीं सकती। आत्मा फौरन जाकर दूसरे शरीर में अपना पार्ट बजाती है। इन बातों को अच्छी रीति समझो, अन्दर घोटते रहो। हम आत्मा बाबा से वर्सा लेते हैं। वर्सा मिलता है सतयुग का। जरूर बाप ने ही भारत को वर्सा दिया होगा। कब वर्सा दिया फिर क्या हुआ? यह मनुष्यों को कुछ भी पता नहीं है। अभी बाप सब बताते हैं। तुम बच्चों को ही स्वदर्शन चक्रधारी बनाया है, फिर तुमने 84 जन्म भोगे। अब फिर मैं आया हूँ, कितना सहज समझाते रहते हैं। बाप को याद करो और मीठे बनो। एम ऑबजेक्ट सामने खड़ी है। बाप वकीलों का वकील है, सब झगड़ों से छुड़ा देते हैं। तुम बच्चों को आन्तरिक खुशी बहुत होनी चाहिए। हम बाबा के बच्चे बने हैं। बाप ने हमको एडाप्ट किया है वर्सा देने। यहाँ तुम आते ही हो वर्सा लेने। बाप कहते हैं बाल-बच्चे आदि देखते हुए बुद्धि बाप और राजधानी की तरफ रहे। पढ़ाई कितनी सहज है। बाप जो तुमको विश्व का मालिक बनाते हैं, उनको तुम भूल जाते हो। पहले अपने को आत्मा जरूर समझो। यह ज्ञान बाप संगम पर ही देते हैं क्योंकि संगम पर ही तुमको पतित से पावन होना है। अच्छा!

    मीठे-मीठे रूहानी ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण कुल भूषण, यह देवताओं से भी ऊंच कुल है। तुम भारत की बहुत ऊंच सेवा करते हो। अभी फिर तुम पूज्य बन जायेंगे। अब पुजारी को पूज्य, कौड़ी से हीरे जैसा बना रहे हैं। ऐसे रूहानी बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

    धारणा के लिए मुख्य सार:-

    1) श्रीमत पर अब हर कर्म श्रेष्ठ करना है, किसी को भी दु:ख नहीं देना है, दैवीगुण धारण करने हैं। बाप के डायरेक्शन पर ही चलना है।

    2) सदैव हर्षित रहने के लिए स्वदर्शन चक्रधारी बनना है, कभी लूनपानी नहीं होना है। सबको बाप का परिचय देना है। बहुत-बहुत मीठा बनना है।
    वरदान:- सदा सुखों के सागर में लवलीन रहने वाले अन्तर्मुखी भव
    कहा जाता अन्तर्मुखी सदा सुखी। जो बच्चे सदा अन्तर्मुखी भव का वरदान प्राप्त कर लेते हैं वह बाप समान सदा सुख के सागर में लवलीन रहते हैं। सुखदाता के बच्चे स्वयं भी सुख दाता बन जाते हैं। सर्व आत्माओं को सुख का ही खजाना बांटते हैं। तो अब अन्तर्मुखी बन ऐसी सम्पन्न मूर्ति बन जाओ जो आपके पास कोई भी किसी भी भावना से आये, अपनी भावना सम्पन्न करके जाये। जैसे बाप के खजाने में अप्राप्त कोई वस्तु नहीं, वैसे आप भी बाप समान भरपूर बनो।
    स्लोगन:- रूहानी शान में रहो तो कभी भी अभिमान की फीलिंग नहीं आयेगी।

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